ग्रामीण विकास
(RURAL DEVELOPMENT)
प्रस्तावना (INTRODUCTION)
- भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ ग्रामीण क्षेत्र है।
- भारत की अधिकांश जनसंख्या गाँवों में निवास करती है।
- ग्रामीण जनसंख्या की आजीविका मुख्यतः:
- कृषि
- पशुपालन
- मछलीपालन
पर निर्भर है।
- ग्रामीण विकास का उद्देश्य:
- ग्रामीण लोगों के जीवन स्तर में सुधार
- गरीबी और बेरोजगारी में कमी
- आर्थिक विकास के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में:
- कम आय
- अविकसित बुनियादी ढाँचा
- अशिक्षा
जैसी समस्याएँ बनी हुई हैं।
- ग्रामीण विकास संतुलित राष्ट्रीय विकास के लिए अनिवार्य है।
**ग्रामीण विकास क्या है?
(WHAT IS RURAL DEVELOPMENT?)**
ग्रामीण विकास का अर्थ
- ग्रामीण विकास एक निरंतर प्रक्रिया है।
- इसका उद्देश्य ग्रामीण लोगों के:
- आर्थिक
- सामाजिक
- सांस्कृतिक
जीवन स्तर को ऊँचा उठाना है।
- इसमें शामिल हैं:
- कृषि विकास
- रोजगार सृजन
- शिक्षा और स्वास्थ्य
ग्रामीण विकास के उद्देश्य
- कृषि उत्पादकता में वृद्धि
- ग्रामीण रोजगार के अवसर बढ़ाना
- गरीबी और असमानता को कम करना
- ग्रामीण बुनियादी ढाँचे का विकास
- प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण
भारत में ग्रामीण विकास की आवश्यकता
- जनसंख्या का बड़ा भाग ग्रामीण क्षेत्रों में रहता है।
- कृषि पर अत्यधिक निर्भरता।
- प्रच्छन्न बेरोजगारी की समस्या।
- ग्रामीण–शहरी असंतुलन।
- शहरों की ओर पलायन।
ग्रामीण क्षेत्रों की प्रमुख समस्याएँ
- छोटे और बिखरे हुए भूमि-धारण।
- मानसून पर निर्भरता।
- सस्ती ऋण सुविधा का अभाव।
- विपणन सुविधाओं की कमी।
- शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव।
**ग्रामीण क्षेत्रों में ऋण और विपणन
(CREDIT AND MARKETING IN RURAL AREAS)**
ग्रामीण ऋण का अर्थ
- ग्रामीण ऋण से तात्पर्य:
- किसानों और ग्रामीण परिवारों को दिए गए ऋण से है।
- ऋण का उपयोग:
- बीज और उर्वरक खरीदने
- कृषि यंत्र लेने
- सिंचाई
- उपभोग आवश्यकताओं
के लिए किया जाता है।
ग्रामीण ऋण के स्रोत
1. गैर-संस्थागत स्रोत
- साहूकार
- व्यापारी और आढ़ती
- जमींदार
- रिश्तेदार
दोष
- ऊँची ब्याज दर
- किसानों का शोषण
- ऋण-जाल की समस्या
2. संस्थागत स्रोत
(क) सहकारी ऋण समितियाँ
- अल्पकालीन ऋण प्रदान करती हैं।
- गाँव स्तर पर कार्यरत।
(ख) वाणिज्यिक बैंक
- राष्ट्रीयकृत बैंकों की महत्वपूर्ण भूमिका।
- प्राथमिकता क्षेत्र ऋण।
(ग) क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRBs)
- छोटे और सीमांत किसानों के लिए।
(घ) NABARD
- ग्रामीण ऋण की शीर्ष संस्था।
- बैंकों को पुनर्वित्त सुविधा।
ग्रामीण ऋण की समस्याएँ
- ऋण की अपर्याप्त उपलब्धता।
- ऋण प्राप्ति में देरी।
- जमानत की आवश्यकता।
- क्षेत्रीय असमानता।
ग्रामीण ऋण सुधार के उपाय
- संस्थागत ऋण का विस्तार।
- किसान क्रेडिट कार्ड योजना।
- स्वयं सहायता समूह (SHGs)।
- ऋण प्रक्रिया को सरल बनाना।
**कृषि विपणन प्रणाली
(AGRICULTURAL MARKET SYSTEM)**
कृषि विपणन का अर्थ
- कृषि विपणन में शामिल है:
- भंडारण
- परिवहन
- ग्रेडिंग
- मूल्य निर्धारण
- बिक्री
कृषि विपणन की समस्याएँ
- भंडारण सुविधाओं का अभाव।
- किसानों द्वारा मजबूरी में बिक्री।
- परिवहन की कमी।
- बिचौलियों का प्रभुत्व।
- मूल्य जानकारी का अभाव।
कृषि विपणन सुधार के उपाय
1. विनियमित बाजार
- सरकार द्वारा नियंत्रित मंडियाँ।
- किसानों को शोषण से सुरक्षा।
2. सहकारी विपणन
- सामूहिक बिक्री।
- बेहतर सौदेबाजी शक्ति।
3. न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP)
- सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम मूल्य।
- मूल्य उतार-चढ़ाव से सुरक्षा।
4. गोदाम और भंडारण
- फसल की सुरक्षा।
- बेहतर कीमत की प्रतीक्षा।
**उत्पादक गतिविधियों में विविधीकरण
(DIVERSIFICATION INTO PRODUCTIVE ACTIVITIES)**
विविधीकरण का अर्थ
- केवल कृषि पर निर्भरता कम करना।
- अन्य आय-सृजन गतिविधियों को अपनाना।
विविधीकरण की आवश्यकता
- फसल असफलता का जोखिम घटाना।
- रोजगार के अवसर बढ़ाना।
- आय में वृद्धि।
- मौसमी बेरोजगारी कम करना।
विविधीकरण के प्रकार
1. फसल विविधीकरण
- विभिन्न प्रकार की फसलें उगाना।
2. सहायक गतिविधियाँ
(क) पशुपालन
- दुग्ध उत्पादन, मुर्गी पालन।
(ख) मत्स्य पालन
- अंतर्देशीय और समुद्री मछलीपालन।
(ग) बागवानी
- फल, सब्जियाँ, फूल।
3. गैर-कृषि गतिविधियाँ
- कुटीर उद्योग
- हस्तशिल्प
- परिवहन
- ग्रामीण पर्यटन
विविधीकरण की चुनौतियाँ
- पूंजी की कमी।
- कौशल और प्रशिक्षण का अभाव।
- बुनियादी ढाँचे की कमी।
- बाजार तक सीमित पहुँच।
**सतत विकास और जैविक कृषि
(SUSTAINABLE DEVELOPMENT AND ORGANIC FARMING)**
सतत विकास का अर्थ
- वर्तमान आवश्यकताओं की पूर्ति करते हुए भविष्य की जरूरतों से समझौता न करना।
- आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण में संतुलन।
कृषि में सतत विकास की आवश्यकता
- रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग।
- भूमि की उर्वरता में कमी।
- जल प्रदूषण।
- जैव विविधता का ह्रास।
जैविक कृषि
अर्थ
- रासायनिक खाद और कीटनाशकों के बिना कृषि।
- प्राकृतिक साधनों का उपयोग।
जैविक कृषि के लाभ
- भूमि की उर्वरता में वृद्धि।
- पर्यावरण संरक्षण।
- स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित।
- दीर्घकालीन स्थायित्व।
जैविक कृषि की सीमाएँ
- प्रारंभिक वर्षों में कम उत्पादन।
- अधिक श्रम की आवश्यकता।
- जागरूकता की कमी।
- विपणन समस्याएँ।
निष्कर्ष (CONCLUSION)
- ग्रामीण विकास समावेशी आर्थिक विकास के लिए अनिवार्य है।
- ऋण, विपणन, विविधीकरण और सतत कृषि ग्रामीण विकास के प्रमुख स्तंभ हैं।
- ग्रामीण समस्याओं का समाधान:
- संस्थागत सुधार
- निवेश वृद्धि
- तकनीकी सहायता
से संभव है।
- जैविक कृषि भविष्य के लिए आवश्यक है।
- सशक्त ग्रामीण क्षेत्र ही मजबूत भारत की नींव है।
