अध्याय 4 : संवेदी (Sensory), ध्यानात्मक (Attentional) और बोधात्मक (Perceptual) प्रक्रियाएँ
कक्षा 11 मनोविज्ञान –
1. प्रस्तावना (Introduction)
- मनुष्य अपने चारों ओर के वातावरण को समझने के लिए संवेदी, ध्यानात्मक और बोधात्मक प्रक्रियाओं का उपयोग करता है।
- संवेदना (Sensation) के माध्यम से हम बाहरी उत्तेजनाओं (Stimuli) को ग्रहण करते हैं।
- ध्यान (Attention) हमें महत्वपूर्ण सूचना चुनने में सहायता करता है।
- बोध (Perception) उन सूचनाओं का अर्थ निकालने और उन्हें संगठित करने की प्रक्रिया है।
- ये तीन प्रक्रियाएँ मिलकर हमें दुनिया को समझने, निर्णय लेने, सीखने, याद रखने और व्यवहार करने की क्षमता देती हैं।
- मनुष्य का व्यवहार केवल उसकी संवेदनाओं पर निर्भर नहीं होता, बल्कि वह सूचना को अर्थपूर्ण रूप में व्यवस्थित करने पर भी आधारित होता है—इसी से बोधात्मक अनुभव बनता है।
2. उत्तेजना का स्वरूप और प्रकार (Nature and Varieties of Stimulus)
उत्तेजना (Stimulus): कोई भी ऊर्जा, वस्तु या घटना जो हमारे संवेदी अंगों को सक्रिय करे।
उत्तेजना की विशेषताएँ
- तीव्रता (Intensity) – उत्तेजना कितनी शक्तिशाली है।
- अवधि (Duration) – उत्तेजना कितने समय तक बनी रहती है।
- आवृत्ति (Frequency) – उत्तेजना कितनी बार दोहराई जाती है।
- जटिलता (Complexity) – सरल या जटिल उत्तेजना।
- नवीनता (Novelty) – नई उत्तेजना ध्यान आकर्षित करती है।
- अर्थपूर्णता (Meaningfulness) – व्यक्तिगत महत्त्व वाली उत्तेजना अधिक स्पष्ट रूप से अनुभव होती है।
उत्तेजना के प्रकार
1. बाह्य उत्तेजना (Distal Stimulus)
- वास्तविक वस्तुएँ, जैसे—पेड़, ध्वनि, घर, वाहन।
2. निकट उत्तेजना (Proximal Stimulus)
- संवेदी अंगों पर पड़ने वाले संकेत, जैसे—रेटिना पर पड़ने वाली प्रकाश तरंगें।
3. ऊर्जात्मक उत्तेजना (Energetic Stimuli)
- प्रकाश, ध्वनि, ताप, दबाव आदि।
4. सामाजिक-मानसिक उत्तेजना (Psychosocial Stimuli)
- मुस्कान, संकेत, चेहरे की भाव-भंगिमा, भाषा।
संवेदी सीमा (Thresholds)
1. निरपेक्ष सीमा (Absolute Threshold)
- न्यूनतम ऊर्जा जिससे किसी उत्तेजना का पता चल सके।
- उदाहरण: शांत अंधेरी रात में बहुत दूर की मोमबत्ती को देख पाना।
2. अंतर सीमा / JND (Difference Threshold)
- दो उत्तेजनाओं में महसूस होने वाला न्यूनतम अंतर।
- वेबर का नियम – अंतर मूल उत्तेजना के अनुपात में होता है।
3. संकेत-अन्वेषण (Signal Detection)
- उत्तेजना पहचानने में संवेदनशीलता + निर्णय एक साथ काम करते हैं।
3. संवेदी विधाएँ (Sense Modalities)
मानव शरीर के पाँच मुख्य संवेदी तंत्र हैं:
A. दृष्टि (Vision)
उत्तेजना: प्रकाश तरंगें
- आँखें प्रकाश को तंत्रिका संकेत में बदलती हैं — इसे ट्रांसडक्शन कहते हैं।
- रेटिना में रॉड्स (Rods) – कम रोशनी में देखने में मदद।
- कोन्स (Cones) – रंग देखने में मदद।
- जानकारी मस्तिष्क के ऑक्सिपिटल लोब तक पहुँचती है।
B. श्रवण (Audition)
उत्तेजना: ध्वनि तरंगें
- ध्वनि कंपन कान के पर्दे से होकर कॉक्लिया तक पहुँचते हैं।
- हेयर सेल्स कंपन को तंत्रिका संकेत में बदलते हैं।
- मस्तिष्क ध्वनि का स्रोत, तीव्रता और पिच पहचानता है।
C. घ्राण (Smell / Olfaction)
उत्तेजना: वायु में रासायनिक अणु
- नाक की गुहा के रिसेप्टर्स गंध को पहचानते हैं।
- यह प्रणाली भावनाओं और स्मृति से जुड़ी होती है (लिम्बिक सिस्टम)।
D. स्वाद (Taste / Gustation)
उत्तेजना: भोजन में रासायनिक पदार्थ
- जीभ पर स्वाद कलिकाएँ चार–पाँच मुख्य स्वाद पहचानती हैं:
- मीठा
- खट्टा
- नमकीन
- कड़वा
- उमामी
- स्वाद, गंध और बनावट मिलकर फ्लेवर बनाते हैं।
E. स्पर्श एवं शरीर बोध (Somatosensory System)
- त्वचा में दबाव, तापमान, दर्द, कंपन के रिसेप्टर्स।
- प्रोप्रियोसेप्शन — शरीर की स्थिति का ज्ञान।
- काइनेसथीसिया — शरीर की गति का ज्ञान।
4. ध्यानात्मक प्रक्रियाएँ (Attentional Processes)
ध्यान (Attention) — चयन की प्रक्रिया जिसमें हम कुछ सूचना पर केंद्रित होते हैं और अन्य को अनदेखा करते हैं।
ध्यान की प्रकृति
- चयनात्मक (Selective)
- सीमित क्षमता (Limited Capacity)
- सक्रिय और गतिशील
- लक्ष्य-निर्देशित व उत्तेजना-निर्देशित दोनों
ध्यान के प्रकार
1. चयनात्मक ध्यान (Selective Attention)
- कई उत्तेजनाओं में से किसी एक पर फोकस करना।
- जैसे—शोर में शिक्षक की आवाज़ सुनना।
2. सतत / एकाग्र ध्यान (Sustained Attention)
- लंबी अवधि तक ध्यान बनाए रखना।
- जैसे—ड्राइविंग, पढ़ाई।
3. विभाजित ध्यान (Divided Attention)
- एक साथ दो या अधिक कार्यों में ध्यान लगाना।
- जैसे—चलते हुए बात करना।
4. ध्यान का स्थानांतरण (Shifting Attention)
- एक कार्य से दूसरे में ध्यान बदलना।
ध्यान को प्रभावित करने वाले कारक
A. बाहरी कारक
- तीव्रता
- आकार
- नवीनता
- गति
- विरोधाभास (Contrast)
B. आंतरिक कारक
- रुचियाँ
- आवश्यकताएँ
- भावनाएँ
- अनुभव
- अपेक्षाएँ
ध्यान के सिद्धांत
1. फिल्टर सिद्धांत (Filter Theory – Broadbent)
- मस्तिष्क शुरुआत में ही अनावश्यक सूचना फ़िल्टर कर देता है।
2. अटेन्यूएशन सिद्धांत
- अनदेखी की गई सूचना पूरी तरह से अवरुद्ध नहीं होती, बस कमज़ोर हो जाती है।
3. संसाधन वितरण सिद्धांत (Resource Allocation Theory)
- ध्यान मानसिक संसाधनों पर निर्भर है।
- कठिन कार्य अधिक संसाधन लेते हैं।
5. बोध प्रक्रियाएँ (Perceptual Processes)
बोध (Perception) — संवेदी सूचना का अर्थपूर्ण संगठन और व्याख्या।
बोध की प्रक्रियाएँ
- चयन (Selection)
- संगठन (Organisation)
- व्याख्या (Interpretation)
बोध की विशेषताएँ
- सक्रिय प्रक्रिया
- निर्माणात्मक (Constructive)
- अनुभव आधारित
- अपेक्षाओं व संदर्भों से प्रभावित
- कभी-कभी गलत भी (Illusions)
6. बोधात्मक संगठन के सिद्धांत (Principles of Perceptual Organisation)
ये सिद्धांत गेश्टाल्ट मनोविज्ञान पर आधारित हैं:
“पूर्ण वस्तु उसके भागों के योग से अधिक है।”
मुख्य सिद्धांत
1. आकृति-भूमि विभाजन (Figure–Ground)
- आकृति (Figure) को पृष्ठभूमि (Ground) से अलग देखना।
2. समानता (Similarity)
- समान वस्तुएँ एक समूह में दिखती हैं।
3. निकटता (Proximity)
- पास-पास स्थित वस्तुओं को समूह माना जाता है।
4. निरंतरता (Continuity)
- आकृति को निरंतर रूप में देखना।
5. अपूर्णता-पूर्ति (Closure)
- मस्तिष्क अधूरी आकृतियों को पूरा कर देता है।
6. सममिति (Symmetry)
- सममित आकृतियाँ पूर्ण और आकर्षक दिखती हैं।
7. सामान्य गति (Common Fate)
- समान दिशा में गति करने वाली वस्तुएँ एक समूह लगती हैं।
7. स्थान, गहराई और दूरी का बोध (Perception of Space, Depth and Distance)
मनुष्य त्रि-आयामी (3D) दुनिया को समझने के लिए गहराई संकेतों का उपयोग करता है।
A. एक-नेत्र संकेत (Monocular Cues)
1. अंत:क्षेप (Interposition)
- निकट वस्तु दूर की वस्तु को ढकती है।
2. आकार संकेत (Relative Size)
- पास की वस्तु बड़ी दिखती है।
3. बनावट ढाल (Texture Gradient)
- पास की वस्तुएँ स्पष्ट, दूर की धुंधली।
4. रेखीय परिप्रेक्ष्य (Linear Perspective)
- समानांतर रेखाएँ दूर जाकर मिलती प्रतीत होती हैं।
5. वायवीय परिप्रेक्ष्य (Aerial Perspective)
- दूर वस्तुएँ अधिक धुंधली।
6. प्रकाश और छाया (Light & Shadow)
- आकृतियों में 3D प्रभाव उत्पन्न होता है।
7. गति पैरेलैक्स (Motion Parallax)
- यात्रा करते समय पास की वस्तुएँ तेज़ चलती दिखती हैं।
B. द्विनेत्री संकेत (Binocular Cues)
1. रेटिनल विषमता (Retinal Disparity)
- दोनों आँखों में थोड़े भिन्न चित्र होते हैं—जिससे गहराई समझ आती है।
2. संवेर्तन (Convergence)
- पास की वस्तु देखते समय आँखें अंदर की ओर मुड़ती हैं।
8. मरीचिकाएँ / भ्रम (Illusions)
भ्रम (Illusion) — जब वास्तविक उत्तेजना का गलत बोध हो।
भ्रम के प्रकार
1. भौतिक भ्रम (Physical Illusions)
- प्रकाश, छाया, परावर्तन आदि से उत्पन्न।
2. मनोवैज्ञानिक भ्रम (Psychological Illusions)
- मस्तिष्क की संगठन प्रक्रियाओं से उत्पन्न।
3. सांस्कृतिक भ्रम (Cultural Illusions)
- सांस्कृतिक अनुभवों के आधार पर।
प्रसिद्ध दृश्य भ्रम
1. मुलर-लायर भ्रम (Müller-Lyer Illusion)
- तीर के सिरों वाली रेखाएँ अलग लंबाई की प्रतीत होती हैं।
2. पोंज़ो भ्रम (Ponzo Illusion)
- समान लंबाई की रेखाएँ दूरी के कारण भिन्न लगती हैं।
3. ज़ोल्नर व हरिंग भ्रम
- रेखाएँ तिरछी या मुड़ी हुई दिखती हैं।
4. चंद्रमा भ्रम (Moon Illusion)
- क्षितिज के पास चंद्रमा बड़ा दिखाई देता है।
9. बोध पर सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभाव (Socio-Cultural Influences on Perception)
बोध केवल जैविक ही नहीं होता, बल्कि समाज और संस्कृति से भी प्रभावित है।
मुख्य प्रभाव
1. सांस्कृतिक पृष्ठभूमि
- विभिन्न संस्कृतियाँ विभिन्न आकृतियाँ अलग तरह से देखती हैं।
- “गैर-कार्पेंटेड जनजातियाँ” मुलर-लायर भ्रम से कम प्रभावित होती हैं।
2. सामाजिक मानदंड
- समाज हमें सिखाता है कि क्या महत्वपूर्ण है और क्या नहीं।
3. भाषा का प्रभाव
- भाषा के शब्द वर्गीकरण को प्रभावित करते हैं।
4. अनुभव
- तकनीक, मीडिया, शिक्षा बोध को बदलते हैं।
5. प्रेरणा और भावनाएँ
- भूखे लोगों को भोजन से जुड़े संकेत जल्दी दिखते हैं।
- भय से तटस्थ उत्तेजनाएँ भी खतरनाक प्रतीत हो सकती हैं।
10. निष्कर्ष (Conclusion)
- संवेदना, ध्यान और बोध मानव जीवन की मूलभूत संज्ञानात्मक प्रक्रियाएँ हैं।
- संवेदना वातावरण से सूचना प्राप्त करती है, ध्यान महत्त्वपूर्ण सूचना चुनता है और बोध उसे अर्थपूर्ण बनाता है।
- बोध एक सक्रिय, निर्माणात्मक और कभी-कभी त्रुटिपूर्ण प्रक्रिया है।
- गहराई बोध और भ्रम दर्शाते हैं कि मस्तिष्क कैसे जटिल जानकारी को सरल रूप में व्यवस्थित करता है।
- बोध पर जैविक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक-सांस्कृतिक सभी कारक प्रभाव डालते हैं।
- ये प्रक्रियाएँ मनुष्य को अपने परिवेश को सही ढंग से समझने और व्यवहार करने में सहायक होती हैं।
