Business study class 12 CBSE अध्याय 8


व्यवसाय अध्ययन – कक्षा 12

अध्याय 8 : नियंत्रण (CONTROLLING)


1. परिचय (Introduction)

  1. नियंत्रण प्रबंध का एक अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य है, जो यह सुनिश्चित करता है कि संगठन के सभी कार्य योजनानुसार और लक्ष्यों के अनुरूप चल रहे हैं।
  2. यह प्रबंध का अंतिम कार्य है, लेकिन इसका महत्व सबसे अधिक है क्योंकि यह पूरे प्रबंध को दिशा और सुधार प्रदान करता है।
  3. नियंत्रण यह पता लगाने की प्रक्रिया है कि कार्य योजना के अनुसार हो रहा है या नहीं, और यदि विचलन (deviation) है, तो उसे कैसे ठीक किया जाए।
  4. नियंत्रण संगठनों में व्यवस्था (order), अनुशासन (discipline) और समन्वय (coordination) बनाए रखने का आधार है।
  5. यह संगठन को अनिश्चित परिस्थितियों में भी स्थिरता (stability) और लक्ष्य प्राप्ति (goal achievement) का आश्वासन देता है।
  6. प्रबंधन के सभी कार्य — योजना, संगठन, स्टाफिंग, निर्देशन — तभी प्रभावी बनते हैं जब उन पर नियंत्रण रखा जाए।
  7. नियंत्रण कार्य भविष्य में होने वाले सुधारों के लिए भी दिशा प्रदान करता है।
  8. तेज प्रतिस्पर्धा और तकनीकी बदलाव के समय नियंत्रण संगठनों को तुरंत प्रतिक्रिया करने में मदद करता है।
  9. यह कर्मचारियों के प्रदर्शन एवं संसाधनों के उपयोग की निगरानी करता है।
  10. नियंत्रण प्रत्येक स्तर पर आवश्यक है— शीर्ष स्तर, मध्य स्तर और निम्न स्तर सभी को इसकी जरूरत होती है।

2. नियंत्रण का अर्थ (Meaning of Controlling)

  1. नियंत्रण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके माध्यम से वास्तविक प्रदर्शन की तुलना योजनाओं में तय मानकों से की जाती है।
  2. यदि कार्य योजना से विचलित है तो उचित सुधारात्मक कदम (corrective action) लिए जाते हैं।
  3. नियंत्रण का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संगठन के लक्ष्य समय पर और प्रभावी तरीके से पूर्ण हों।
  4. नियंत्रण केवल त्रुटि ढूँढने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह सुधारात्मक तथा भविष्य उन्मुख प्रक्रिया (forward looking process) भी है।
  5. नियंत्रण में तीन मुख्य घटक होते हैं—
    • मानक निर्धारित करना (Establishing Standards)
    • प्रदर्शन को मापना (Measuring Performance)
    • विचलन का विश्लेषण और सुधार (Corrective Action)
  6. यह सुनिश्चित करता है कि सभी गतिविधियाँ निर्धारित नियमों, नीतियों और प्रक्रियाओं के अनुरूप चलें।
  7. नियंत्रण संसाधनों के अपव्यय को रोकता है और दक्षता (efficiency) बढ़ाता है।
  8. यह कर्मचारियों में जिम्मेदारी की भावना विकसित करता है।
  9. नियंत्रण संगठन को बदलते व्यावसायिक वातावरण के अनुसार ढलने की क्षमता प्रदान करता है।
  10. नियंत्रण प्रबंध का एक निरंतर और सतत (continuous) कार्य है।

3. नियंत्रण का महत्व (Importance of Controlling)

  1. लक्ष्य प्राप्ति सुनिश्चित करता है
    नियंत्रण यह सुनिश्चित करता है कि हर गतिविधि लक्ष्य प्राप्ति की दिशा में हो।
  2. प्रदर्शन में सुधार
    नियंत्रण से कर्मचारियों की उत्पादकता एवं कार्य गुणवत्ता दोनों में सुधार होता है।
  3. व्यर्थ खर्चों में कमी
    विचलन समय पर ज्ञात होने से संसाधनों का गलत उपयोग रोका जा सकता है।
  4. समन्वय में वृद्धि
    सभी विभाग एक समान लक्ष्यों एवं मानकों के अनुसार कार्य करते हैं।
  5. वातावरणीय परिवर्तनों के अनुसार अनुकूलन
    नियंत्रण से संगठन परिवर्तन के प्रति संवेदनशील और उत्तरदायी बनता है।
  6. उद्यम में अनुशासन बनाए रखना
    नियमों के उल्लंघन की पहचान होने से अनुशासन बढ़ता है।
  7. गुणवत्ता सुनिश्चित करता है
    उत्पादन मानकों की तुलना से यह पता चलता है कि गुणवत्ता ठीक है या सुधार की आवश्यकता है।
  8. प्रबंधकीय कार्यों में सुधार
    नियंत्रण से प्रबंधक बेहतर योजना बनाते हैं क्योंकि उन्हें वास्तविक प्रदर्शन का स्पष्ट ज्ञान मिलता है।
  9. टीमवर्क और जिम्मेदारी
    कर्मचारियों को पता होता है कि उनके कार्य का मूल्यांकन होगा, अतः वे अधिक जिम्मेदारी से कार्य करते हैं।
  10. भविष्य के लिए बेहतर योजना
    पिछले प्रदर्शन का विश्लेषण करके भविष्य की योजनाएँ अधिक सटीक बनती हैं।

4. कंप्यूटर मॉनिटरिंग के माध्यम से नियंत्रण (Control Through Computer Monitoring)

आधुनिक युग में कंप्यूटर और सूचना-प्रौद्योगिकी (IT) नियंत्रण प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं।

कंप्यूटर मॉनिटरिंग क्या है?

कंप्यूटर मॉनिटरिंग का अर्थ है कि कंप्यूटर, सॉफ़्टवेयर और डिजिटल सिस्टम के माध्यम से गतिविधियों, प्रक्रियाओं और कर्मचारियों के प्रदर्शन पर निगरानी रखना।

मुख्य विशेषताएँ

  1. तत्काल जानकारी (Real-time Information)
    कंप्यूटर तुरंत डेटा दिखाता है जिससे त्वरित निर्णय लिए जा सकते हैं।
  2. त्रुटि रहित (Error-free)
    मशीन द्वारा रिकॉर्ड किए गए डेटा में मानवीय त्रुटियों की संभावना कम होती है।
  3. डेटा विश्लेषण (Data Analytics)
    कंप्यूटर बड़े से बड़े डेटा का विश्लेषण तेज गति से कर सकता है।
  4. दूरस्थ निगरानी (Remote Monitoring)
    इंटरनेट के माध्यम से प्रबंधक दुनिया के किसी भी कोने से संगठन की गतिविधि देख सकते हैं।
  5. रिपोर्टिंग और रिकॉर्डिंग
    सिस्टम स्वतः रिपोर्ट्स तैयार कर सकता है—
    • बिक्री रिपोर्ट
    • उत्पादन रिपोर्ट
    • स्टॉक रिपोर्ट
    • कर्मचारी उपस्थिति रिपोर्ट
  6. स्वचालित चेतावनी (Auto Alerts)
    यदि कोई कार्य निर्धारित मानकों से विचलित होता है, तो सिस्टम अलर्ट भेज देता है।

कंप्यूटर मॉनिटरिंग के लाभ

  1. निर्णय तेजी से लिए जाते हैं।
  2. पारदर्शिता बढ़ती है।
  3. लागत कम होती है।
  4. गुणवत्ता में सुधार।
  5. धोखाधड़ी की संभावना कम।
  6. कार्यकुशलता बढ़ती है।

5. प्रदर्शन को मापने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग होने वाले मानक (Standards Used in Functional Areas to Gauge Performance)

नियंत्रण तब ही संभव होता है जब हर कार्य के लिए उपयुक्त मानक तय किए जाएँ।

1. उत्पादन क्षेत्र (Production Area Standards)

  1. उत्पादन की मात्रा (quantity)
  2. उत्पादन की गुणवत्ता (quality)
  3. मशीन उपयोग (machine utilization)
  4. श्रम उत्पादकता (labour productivity)
  5. उत्पादन लागत (cost per unit)

2. वित्तीय क्षेत्र (Financial Area Standards)

  1. निवेश पर प्रतिफल (ROI)
  2. लाभ मार्जिन
  3. लागत नियंत्रण
  4. नकदी प्रवाह (cash flow)
  5. बजट पालन (budgetary control)

3. विपणन क्षेत्र (Marketing Area Standards)

  1. बिक्री लक्ष्य
  2. बाज़ार हिस्सेदारी
  3. ग्राहक संतुष्टि
  4. विज्ञापन की प्रभावशीलता
  5. वितरण की दक्षता

4. मानव संसाधन क्षेत्र (Human Resource Standards)

  1. कर्मचारी उपस्थिति
  2. प्रतिधारण दर (retention)
  3. प्रशिक्षण के परिणाम
  4. कर्मचारी उत्पादकता
  5. कर्मचारी संतुष्टि

5. अनुसंधान एवं विकास (R&D)

  1. नए उत्पादों की संख्या
  2. अनुसंधान की गुणवत्ता
  3. नवाचार (innovation)
  4. लागत और समय सीमा का पालन

हर विभाग के लिए इन मानकों का उपयोग करके नियंत्रण प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनती है।


6. क्रिटिकल पॉइंट कंट्रोल (Critical Point Control) और एमबीई (Management by Exception) के फायदे

A. क्रिटिकल पॉइंट कंट्रोल (CPC)

यह नियंत्रण प्रणाली का वह तरीका है जिसमें प्रबंधक केवल महत्वपूर्ण बिंदुओं यानी critical points की निगरानी करते हैं।

फायदे

  1. समय की बचत
    प्रबंधक सिर्फ मुख्य क्षेत्रों पर ध्यान देते हैं।
  2. प्राथमिकताओं की स्पष्टता
    यह बताता है कि कौन-से क्षेत्र संगठन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
  3. दक्षता में वृद्धि
    ऊर्जा और संसाधन सही दिशा में लगाए जाते हैं।
  4. जोखिम कम
    महत्वपूर्ण समस्याएँ समय पर पता चल जाती हैं।

B. एमबीई – Management by Exception

इसका अर्थ है केवल वही मामलों पर ध्यान देना जहाँ विचलन (deviation) अधिक हो।

फायदे

  1. प्रबंधकों के समय का सही उपयोग
    वे हर छोटे कार्य पर ध्यान देने के बजाय महत्वपूर्ण समस्याओं पर ध्यान देते हैं।
  2. निर्णय प्रक्रिया तेज
    गंभीर विचलन पर तुरंत कार्रवाई होती है।
  3. कर्मचारियों को अधिकार सौंपना
    छोटे मुद्दों पर कर्मचारी स्वयं निर्णय लेते हैं।
  4. प्रबंधकीय दक्षता बढ़ती है
    शीर्ष प्रबंधन अपनी ऊर्जा महत्त्वपूर्ण कार्यों पर लगाता है।
  5. संगठन में अनुशासन बढ़ता है
    कर्मचारियों को पता होता है कि केवल बड़े विचलन पर कार्यवाही होती है, इसलिए वे मानकों का पालन करते हैं।

7. निष्कर्ष (Conclusion)

  1. नियंत्रण प्रबंध का एक अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य है जो संगठन को लक्ष्य प्राप्ति में सहायक बनाता है।
  2. यह सुनिश्चित करता है कि सभी गतिविधियाँ निर्धारित योजनाओं, नीतियों और मानकों के अनुरूप हों।
  3. आधुनिक कंप्यूटर तकनीक नियंत्रण को तेज, सटीक और अधिक कुशल बनाती है।
  4. हर विभाग में प्रदर्शन मापन के लिए अलग-अलग मानकों की आवश्यकता होती है।
  5. क्रिटिकल पॉइंट कंट्रोल और मैनेजमेंट बाय एक्सेप्शन जैसे आधुनिक नियंत्रण तकनीकें समय और संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग सुनिश्चित करती हैं।
  6. नियंत्रण प्रक्रिया न केवल त्रुटियों को पहचानती है बल्कि भविष्य में बेहतर योजनाएँ बनाने में भी सहायता करती है।
  7. बदलते व्यावसायिक वातावरण में नियंत्रण संगठनों के लिए प्रतिस्पर्धी बने रहने का आधार है।
  8. इस प्रकार, नियंत्रण संगठन के सुचारू संचालन और सतत विकास की नींव है।

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