political science CBSE class 11 course A Chapter 4नमूना प्रश्नपत्र


CBSE नमूना प्रश्नपत्र (Political Science – कक्षा 11)

कोर्स A – अध्याय 4: सामाजिक न्याय
पूर्ण अंक: 40 | समय: 90 मिनट
(कोपीराइट मुक्त – स्वतंत्र उपयोग के लिए)


सेक्शन – A (प्रत्येक 1 अंक)

निम्नों को लगभग 20-30 शब्दों में उत्तर दें।
(1 × 5 = 5 अंक)

  1. ‘सामाजिक न्याय’ क्या है?
  2. समाज में एक अन्यायपूर्ण प्रथा का उदाहरण दें।
  3. पुस्तक “A Theory of Justice” के लेखक कौन हैं?
  4. John Rawls के अनुसार ‘न्यायपूर्ण वितरण’ का क्या अर्थ है?
  5. प्राकृतिक असमानता और सामाजिक असमानता में एक अंतर बताएं।

उत्तर – सेक्शन A:

  1. सामाजिक न्याय का अर्थ है — सभी व्यक्तियों को सामाजिक, राजनीतिक एवं आर्थिक जीवन में समान अवसर, सम्मान और गरिमा मिलना।
  2. उदाहरण: अस्पृश्यता या लिंग-भेद सामाजिक अन्याय की प्रथा हो सकती है।
  3. John Rawls ने “A Theory of Justice” नामक पुस्तक लिखी थी।
  4. न्यायपूर्ण वितरण का अर्थ है — ऐसे संसाधनों एवं अवसरों का वितरण जो समाज के सबसे कमजोर वर्गों की भलाई करता हो।
  5. प्राकृतिक असमानता जैव-शारीरिक या जन्मजात होती है, जबकि सामाजिक असमानता समाज-संस्था, वर्ग, जाति या जन्म-स्थिति से उत्पन्न होती है।

सेक्शन – B (प्रत्येक 2 अंक)

करीब 50-60 शब्दों में उत्तर दें।
(2 × 5 = 10 अंक)

  1. लोकतंत्र में न्याय का विचार क्यों महत्वपूर्ण है?
  2. John Rawls के न्याय के दो सिद्धांत क्या हैं?
  3. समानता और न्याय में क्या भिन्नता है?
  4. “अज्ञानता का आवरण” (veil of ignorance) का क्या अर्थ है?
  5. सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने में राज्य की भूमिका क्या है?

उत्तर – सेक्शन B:
6. न्याय लोकतंत्र का आधार है क्योंकि न्याय से ही सभी नागरिकों को समान अधिकार और अवसर मिलते हैं, जिससे शोषण और अन्याय पर अंकुश लगता है।
7. Rawls के दो सिद्धांत हैं: (i) समान मूल-स्वतंत्रताएँ: सभी को समान बुनियादी स्वतंत्रताएँ मिलनी चाहिए। (ii) अंतर-सिद्धांत: सामाजिक-आर्थिक असमानताएँ तभी स्वीकार्य हैं जब वे सबसे कमजोर वर्ग के हित में हों।
8. समानता का अर्थ है समान व्यवहार या समान स्थिति, जबकि न्याय का अर्थ है निष्पक्ष व्यवहार — कभी-कभी समान अवसर देने के लिए असमान इलाज भी करना पड़ सकता है।
9. अज्ञानता का आवरण एक काल्पनिक अवस्था है जिसमें व्यक्ति अपनी जाति, लिंग, सामाजिक स्थिति आदि नहीं जानता; इस स्थिति में निष्पक्ष नियम बनाए जाते हैं।
10. राज्य कानून बनाता है, संसाधन बाँटता है, कल्याणकारी योजनाएँ लागू करता है एवं कमजोरों को सशक्त बनाने का काम करता है — इस प्रकार सामाजिक न्याय को बढ़ावा देता है।


सेक्शन – C (प्रत्येक 4 अंक)

करीब 100-120 शब्दों में उत्तर दें।
(4 × 3 = 12 अंक)

  1. वितरणात्मक न्याय और दंडात्मक (retributive) न्याय में अंतर स्पष्ट करें।
  2. सामाजिक न्याय का विचार कैसे समानता से जुड़ा है?
  3. भारत में सामाजिक न्याय प्राप्ति के समक्ष दो चुनौतियों पर चर्चा करें।

उत्तर – सेक्शन C:
11. वितरणात्मक न्याय का संबंध है संसाधनों, अवसरों और अधिकारों के न्यायसंगत बाँटवारे से, जबकि दंडात्मक न्याय का संबंध है गलत कृत्यों के लिए उचित दंड या प्रतिकार से। पहले का लक्ष्य असमानताओं को कम करना है, दूसरे का लक्ष्य सामाजिक नियमों का पालन सुनिश्चित करना।
12. सामाजिक न्याय और समानता गहरे रूप से जुड़े हैं क्योंकि समानता उस स्थिति को इंगित करती है जिसमें सभी को समान अधिकार और अवसर मिलते हैं, जबकि सामाजिक न्याय उन सामाजिक बाधाओं (जाति, लिंग, वर्ग) को हटाकर वास्तविक समानता सुनिश्चित करता है। न्याय का अर्थ है अवसरों की समानता सुनिश्चित करना, केवल विधिवत समानता नहीं।
13. चुनौतियाँ: (i) आर्थिक असमानता — अमीर और गरीब के बीच संसाधनों का बढ़ता अंतर। (ii) सामाजिक भेद-भाव — जैसे जातिगत भेदभाव, लिंग-भेद, जो सामाजिक न्याय के मार्ग में बाधा हैं। ये सामाजिक न्याय की दिशा में hinder करते हैं।


सेक्शन – D (प्रत्येक 6 अंक)

करीब 200-250 शब्दों में उत्तर दें।
(6 × 2 = 12 अंक)

  1. John Rawls के न्याय-सिद्धांत का विस्तृत वर्णन करें।
  2. भारत में सामाजिक न्याय के अर्थ और उसके महत्व को समझाएँ।

उत्तर – सेक्शन D:
14. John Rawls के न्याय-सिद्धांत:
John Rawls ने “A Theory of Justice” में प्रस्तावित किया कि एक न्यायपूर्ण समाज वो है जहाँ संस्थाएँ और नियम ऐसे हों कि सभी व्यक्तियों को निष्पक्ष रूप से लाभ मिले। उन्होंने दो प्रमुख सिद्धांत दिए: (i) स्वतंत्रता-सिद्धांत (Liberty Principle): प्रत्येक व्यक्ति को समान बुनियादी स्वतंत्रताएँ मिलनी चाहिए — जैसे अभिव्यक्ति, धर्म, राजनीतिक भागीदारी। (ii) अंतर-सिद्धांत (Difference Principle): सामाजिक-आर्थिक असमानताएँ तभी स्वीकार्य हैं जब वे सबसे कमजोर वर्गों के हित में हों। उन्होंने “मूल अवस्था” और “अज्ञानता का आवरण” की अवधारणा दी, जहाँ व्यक्ति अपनी जाति, लिंग, प्रतिभा आदि नहीं जानते और निष्पक्ष नियम चुनते हैं। इस प्रकार Rawls का सिद्धांत स्वतंत्रता तथा समानता के बीच संतुलन स्थापित करता है।
15. भारत में सामाजिक न्याय का अर्थ और महत्व:
भारत में सामाजिक न्याय का मतलब है कि सभी नागरिक — चाहे उनकी जाति, लिंग, धर्म या सामाजिक स्थिति कुछ भी हो — समान अवसर, संसाधन और सम्मान प्राप्त करें। संविधान की प्रस्तावना में “सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय” का लक्ष्य रखा गया है। सामाजिक न्याय का महत्व इसलिए है क्योंकि यह विभाजन, भेदभाव और असमानता को दूर करके एक समावेशी और लोकतांत्रिक समाज बनाता है। भारत में यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इतिहास, समाज और अर्थव्यवस्था में कई तरह की असमानताएँ मौजूद हैं। सामाजिक न्याय से ही हम एक ऐसा समाज बना सकते हैं जहाँ सभी को आत्म-सम्मान, अवसर और विकास का समान अवसर मिले।



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