Economics class 11 CBSE अध्याय 7


अर्थशास्त्र – कक्षा 11

अध्याय 7: पर्यावरण और सतत विकास


परिचय (INTRODUCTION)

  • आर्थिक विकास का मुख्य उद्देश्य लोगों के जीवन स्तर में सुधार करना है।
  • लंबे समय तक विकास को केवल:
    • आय में वृद्धि
    • औद्योगीकरण
    • शहरीकरण
      से मापा जाता रहा।
  • विकास की इस प्रक्रिया में प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन हुआ।
  • उद्योगों, परिवहन, कृषि और शहरी गतिविधियों से:
    • वायु प्रदूषण
    • जल प्रदूषण
    • भूमि क्षरण
    • वनों की कटाई
      जैसी समस्याएँ उत्पन्न हुईं।
  • इससे मानव स्वास्थ्य और जीवन पर गंभीर प्रभाव पड़ा।
  • आज यह समझा गया है कि पर्यावरण की उपेक्षा कर किया गया विकास हानिकारक है
  • इसलिए पर्यावरण और सतत विकास की अवधारणा महत्वपूर्ण हो गई है।
  • सतत विकास का उद्देश्य:
    • वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं की पूर्ति
    • भविष्य की पीढ़ियों के लिए संसाधनों का संरक्षण

पर्यावरण — परिभाषा एवं कार्य (ENVIRONMENT — DEFINITION AND FUNCTIONS)

पर्यावरण का अर्थ

  • पर्यावरण से आशय हमारे चारों ओर मौजूद सभी वस्तुओं और परिस्थितियों से है।
  • इसमें शामिल हैं:
    • प्राकृतिक तत्व – वायु, जल, मृदा, वन, वन्यजीव
    • मानव निर्मित तत्व – सड़कें, भवन, उद्योग
    • सामाजिक एवं सांस्कृतिक परिवेश
  • पर्यावरण जीवन के लिए आवश्यक सभी संसाधन प्रदान करता है।

पर्यावरण की परिभाषा

  • पर्यावरण प्राकृतिक एवं मानव निर्मित तत्वों का वह समुच्चय है जो मानव जीवन को प्रभावित करता है।
  • इसमें जैविक (जीवित) और अजैविक (निर्जीव) दोनों घटक शामिल होते हैं।

पर्यावरण के कार्य (FUNCTIONS OF ENVIRONMENT)

पर्यावरण चार प्रमुख कार्य करता है:


1. संसाधनों की आपूर्ति

  • पर्यावरण उत्पादन और उपभोग के लिए संसाधन प्रदान करता है।
  • संसाधन दो प्रकार के होते हैं:

नवीकरणीय संसाधन

  • जो प्राकृतिक रूप से पुनः उत्पन्न हो सकते हैं।
  • उदाहरण:
    • वन
    • जल
    • पवन ऊर्जा
    • सौर ऊर्जा

अनवीकरणीय संसाधन

  • जो सीमित मात्रा में उपलब्ध होते हैं।
  • उदाहरण:
    • कोयला
    • पेट्रोलियम
    • प्राकृतिक गैस
    • खनिज
  • संसाधनों के अत्यधिक उपयोग से संसाधन क्षय होता है।

2. अपशिष्टों का अवशोषण

  • पर्यावरण मानव गतिविधियों से उत्पन्न अपशिष्टों को अवशोषित करता है।
  • जैसे:
    • नदियाँ गंदे पानी को
    • वायुमंडल धुएँ और गैसों को
  • पर्यावरण की अपशिष्ट अवशोषण क्षमता सीमित होती है
  • अधिक अपशिष्ट से:
    • प्रदूषण
    • बीमारियाँ
    • जलवायु परिवर्तन
      होता है।

3. जीवन का पोषण

  • पर्यावरण जीवन को बनाए रखने के लिए:
    • ऑक्सीजन
    • जल
    • भोजन
    • उपयुक्त जलवायु
      प्रदान करता है।
  • पारिस्थितिकी तंत्र संतुलन बनाए रखता है।
  • पारिस्थितिकी असंतुलन से जीवन संकट में पड़ सकता है।

4. सौंदर्यात्मक सेवाएँ

  • पर्यावरण सौंदर्य और मनोरंजन प्रदान करता है।
  • जैसे:
    • पर्वत
    • नदियाँ
    • वन
    • राष्ट्रीय उद्यान
  • ये मानसिक शांति, पर्यटन और सांस्कृतिक विकास में सहायक हैं।

भारत में पर्यावरण की स्थिति (STATE OF INDIA’S ENVIRONMENT)

भारत तीव्र विकास के कारण कई पर्यावरणीय समस्याओं का सामना कर रहा है।


1. वायु प्रदूषण

  • कारण:
    • औद्योगिक उत्सर्जन
    • वाहनों का धुआँ
    • जीवाश्म ईंधन का दहन
  • प्रभाव:
    • श्वसन रोग
    • वैश्विक ऊष्मीकरण
    • अम्ल वर्षा

2. जल प्रदूषण

  • गंगा, यमुना जैसी नदियाँ अत्यधिक प्रदूषित हैं।
  • कारण:
    • औद्योगिक अपशिष्ट
    • अशोधित सीवेज
    • कृषि रसायन
  • परिणाम:
    • जलजनित रोग
    • जलीय जीवों की मृत्यु

3. भूमि क्षरण

  • कारण:
    • वनों की कटाई
    • अधिक चराई
    • खनन
  • परिणाम:
    • मृदा की उर्वरता में कमी
    • मरुस्थलीकरण

4. वनों की कटाई

  • कृषि, शहरीकरण और उद्योगों के लिए जंगल काटे जा रहे हैं।
  • दुष्परिणाम:
    • जैव विविधता का नुकसान
    • मिट्टी का कटाव
    • जलवायु असंतुलन

5. ठोस अपशिष्ट समस्या

  • शहरीकरण से प्लास्टिक और ई-कचरे में वृद्धि।
  • उचित निपटान व्यवस्था का अभाव।

6. जैव विविधता का ह्रास

  • कई वनस्पति और पशु प्रजातियाँ विलुप्त होने की कगार पर हैं।
  • कारण:
    • आवास विनाश
    • प्रदूषण
    • अवैध शिकार

सतत विकास (SUSTAINABLE DEVELOPMENT)

सतत विकास का अर्थ

  • सतत विकास वह विकास है जो:
    • वर्तमान आवश्यकताओं को पूरा करे
    • भविष्य की पीढ़ियों के हितों को नुकसान न पहुँचाए

परिभाषा (ब्रंटलैंड आयोग, 1987)

“सतत विकास वह विकास है जो वर्तमान की आवश्यकताओं की पूर्ति करता है, बिना भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकताओं से समझौता किए।”


सतत विकास की विशेषताएँ

  • दीर्घकालीन आर्थिक विकास
  • प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण
  • पर्यावरण संतुलन
  • पीढ़ियों के बीच समानता
  • जीवन गुणवत्ता में सुधार

सतत विकास की आवश्यकता

  • सीमित प्राकृतिक संसाधन
  • बढ़ती जनसंख्या
  • पर्यावरण प्रदूषण
  • जलवायु परिवर्तन
  • भविष्य की सुरक्षा

सतत विकास की रणनीतियाँ (STRATEGIES FOR SUSTAINABLE DEVELOPMENT)


1. नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग

  • सौर, पवन और जल ऊर्जा का प्रयोग।
  • जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना।

2. अनवीकरणीय संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग

  • संसाधनों का कुशल प्रयोग।
  • पुनर्चक्रण और पुनः उपयोग।

3. प्रदूषण नियंत्रण

  • स्वच्छ तकनीक अपनाना।
  • कचरा प्रबंधन प्रणाली।

4. वनीकरण और वन संरक्षण

  • अधिक वृक्षारोपण।
  • वनों की रक्षा।

5. सतत कृषि

  • जैविक खेती।
  • रासायनिक उर्वरकों का सीमित उपयोग।

6. जनसंख्या नियंत्रण

  • शिक्षा और जागरूकता।
  • परिवार नियोजन कार्यक्रम।

7. जल संरक्षण

  • वर्षा जल संचयन।
  • सूक्ष्म सिंचाई तकनीक।

8. जन जागरूकता

  • पर्यावरण शिक्षा।
  • सामुदायिक भागीदारी।

9. सरकार की भूमिका

  • पर्यावरण संरक्षण कानून।
  • हरित नीतियों का प्रोत्साहन।

10. अंतरराष्ट्रीय सहयोग

  • वैश्विक पर्यावरण समझौते।
  • साझा जिम्मेदारी।

निष्कर्ष (CONCLUSION)

  • पर्यावरण मानव जीवन और विकास का आधार है।
  • अनियंत्रित विकास ने गंभीर पर्यावरणीय समस्याएँ उत्पन्न की हैं।
  • सतत विकास आर्थिक प्रगति और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करता है।
  • पर्यावरण की रक्षा की जिम्मेदारी:
    • सरकार
    • उद्योग
    • नागरिक
      सभी की है।
  • केवल सतत विकास ही भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और स्वस्थ जीवन सुनिश्चित कर सकता है।

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