Economics class 11 CBSE अध्याय 4


भारत में मानव पूंजी निर्माण

(HUMAN CAPITAL FORMATION IN INDIA)


प्रस्तावना (INTRODUCTION)

  • किसी भी देश का आर्थिक विकास केवल भूमि, मशीन, पूंजी जैसे भौतिक संसाधनों पर निर्भर नहीं करता।
  • देश की जनसंख्या की गुणवत्ता आर्थिक विकास का प्रमुख आधार होती है।
  • मानव संसाधन तब मानव पूंजी बनता है जब उसमें:
    • शिक्षा
    • स्वास्थ्य
    • कौशल
    • प्रशिक्षण
      का निवेश किया जाता है।
  • मनुष्य:
    • उत्पादन का साधन भी है
    • विकास का उद्देश्य भी है
  • भारत जैसे देश में विशाल जनसंख्या को उत्पादक मानव पूंजी में बदलना अत्यंत आवश्यक है।
  • यह अध्याय मानव पूंजी की अवधारणा, मानव विकास से उसका संबंध, भारत में मानव पूंजी निर्माण की स्थिति तथा भविष्य की संभावनाओं पर प्रकाश डालता है।

मानव पूंजी क्या है? (WHAT IS HUMAN CAPITAL?)

मानव पूंजी का अर्थ

  • मानव पूंजी से आशय उस ज्ञान, कौशल, अनुभव, स्वास्थ्य एवं शिक्षा से है जो किसी व्यक्ति के पास होती है।
  • यह व्यक्ति की उत्पादन क्षमता को बढ़ाती है
  • मानव पूंजी:
    • मानव में निहित होती है
    • इसे खरीदा या बेचा नहीं जा सकता

मानव पूंजी निर्माण (Human Capital Formation)

  • मानव पूंजी निर्माण का अर्थ है:
    • मानव पूंजी के भंडार में वृद्धि करना
  • इसके अंतर्गत किया जाने वाला निवेश:
    • शिक्षा
    • स्वास्थ्य
    • प्रशिक्षण
    • पोषण
    • प्रवासन
    • सूचना

मानव पूंजी निर्माण के स्रोत

1. शिक्षा में निवेश

  • सबसे महत्वपूर्ण स्रोत।
  • ज्ञान, दक्षता और नवाचार क्षमता में वृद्धि करता है।

2. स्वास्थ्य में निवेश

  • स्वस्थ व्यक्ति अधिक उत्पादक होता है।
  • जीवन प्रत्याशा बढ़ती है।
  • कार्य क्षमता में सुधार होता है।

3. कार्यस्थल पर प्रशिक्षण

  • नौकरी के दौरान दिया जाने वाला प्रशिक्षण।
  • व्यावहारिक कौशल विकसित करता है।

4. प्रवासन

  • बेहतर रोजगार व शिक्षा के लिए स्थान परिवर्तन।
  • आय और कौशल में वृद्धि।

5. सूचना

  • शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी।
  • सही निर्णय लेने में सहायक।

मानव पूंजी और मानव विकास (HUMAN CAPITAL AND HUMAN DEVELOPMENT)

मानव विकास का अर्थ

  • मानव विकास का अर्थ है:
    • लोगों के जीवन स्तर में सुधार
    • उनके विकल्पों का विस्तार
  • इसमें शामिल हैं:
    • शिक्षा
    • स्वास्थ्य
    • आय
    • स्वतंत्रता
    • समानता

मानव पूंजी और मानव विकास में अंतर

आधारमानव पूंजीमानव विकास
उद्देश्यउत्पादन क्षमताकल्याण
प्रकृतिविकास का साधनविकास का लक्ष्य
मापनशिक्षा, कौशलHDI
दृष्टिकोणआर्थिकसामाजिक

मानव पूंजी और मानव विकास का संबंध

  • मानव पूंजी से:
    • आय बढ़ती है
    • आर्थिक विकास होता है
  • मानव विकास से:
    • जीवन स्तर सुधरता है
  • दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं।

**भारत में मानव पूंजी निर्माण की स्थिति

(STATE OF HUMAN CAPITAL FORMATION IN INDIA)**

1. जनसंख्या का आकार और वृद्धि

  • भारत विश्व की सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है।
  • यह:
    • अवसर (जनसांख्यिकीय लाभ)
    • या बोझ (यदि अशिक्षित हो)
      दोनों बन सकती है।

2. शिक्षा से संबंधित संकेतक

साक्षरता दर

  • समय के साथ साक्षरता दर में वृद्धि।
  • अभी भी विकसित देशों से कम।

लैंगिक अंतर

  • महिला साक्षरता पुरुषों से कम।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक अंतर।

3. स्वास्थ्य संकेतक

जीवन प्रत्याशा

  • स्वास्थ्य सुविधाओं के कारण बढ़ी है।

शिशु मृत्यु दर

  • घट रही है, परंतु अभी भी चिंता का विषय।

मातृ मृत्यु दर

  • सरकारी योजनाओं से धीरे-धीरे कमी।

4. कौशल विकास

  • कुशल श्रमिकों की कमी।
  • शिक्षा और रोजगार के बीच अंतर।
  • व्यावसायिक शिक्षा अपर्याप्त।

5. शिक्षा और स्वास्थ्य पर सार्वजनिक व्यय

  • शिक्षा पर व्यय GDP का लगभग 3–4%।
  • स्वास्थ्य पर व्यय लगभग 1–2%।
  • निजी व्यय अधिक होने से असमानता बढ़ती है।

6. क्षेत्रीय असमानता

  • केरल, तमिलनाडु जैसे राज्यों में बेहतर स्थिति।
  • बिहार, यूपी जैसे राज्यों में पिछड़ापन।

**भारत में शिक्षा क्षेत्र

(EDUCATION SECTOR IN INDIA)**

मानव पूंजी निर्माण में शिक्षा की भूमिका

  • शिक्षा:
    • उत्पादकता बढ़ाती है
    • सामाजिक समानता लाती है
    • आर्थिक विकास को गति देती है

भारत में शिक्षा की संरचना

1. प्राथमिक शिक्षा

  • बुनियादी साक्षरता पर बल।
  • योजनाएँ:
    • शिक्षा का अधिकार अधिनियम
    • मध्याह्न भोजन योजना

2. माध्यमिक शिक्षा

  • कौशल विकास।
  • उच्च शिक्षा की तैयारी।

3. उच्च शिक्षा

  • विश्वविद्यालय, तकनीकी संस्थान।
  • विश्व की सबसे बड़ी शिक्षा प्रणालियों में से एक।

शिक्षा क्षेत्र की समस्याएँ

  • ड्रॉपआउट दर अधिक।
  • शिक्षा की गुणवत्ता कम।
  • शिक्षकों की कमी।
  • ग्रामीण–शहरी असमानता।

भविष्य की संभावनाएँ (FUTURE PROSPECTS)

1. जनसांख्यिकीय लाभ

  • युवा जनसंख्या भारत की ताकत।
  • सही निवेश से तीव्र विकास संभव।

2. कौशल विकास कार्यक्रम

  • स्किल इंडिया मिशन
  • व्यावसायिक शिक्षा

3. सार्वजनिक निवेश में वृद्धि

  • शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च बढ़ाने की आवश्यकता।

4. तकनीकी विकास

  • डिजिटल शिक्षा
  • ऑनलाइन स्वास्थ्य सेवाएँ

5. समावेशी मानव पूंजी निर्माण

  • महिलाओं
  • ग्रामीण क्षेत्रों
  • कमजोर वर्गों पर विशेष ध्यान

निष्कर्ष (CONCLUSION)

  • मानव पूंजी निर्माण भारत के आर्थिक विकास की कुंजी है।
  • विशाल जनसंख्या भारत के लिए अवसर भी है और चुनौती भी।
  • समस्याएँ:
    • कम सार्वजनिक व्यय
    • कौशल की कमी
    • असमान विकास
  • समाधान:
    • शिक्षा और स्वास्थ्य में निवेश
    • कौशल-आधारित शिक्षा
    • समावेशी नीतियाँ
  • मानव पूंजी में निवेश ही भारत के उज्ज्वल भविष्य की नींव है।

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