political science CBSE class 11 course A Chapter 4.


कक्षा 11 राजनीतिक विज्ञान नोट्स – कार्यपालिका


1. परिचय

  • कार्यपालिका वह अंग है जो कानूनों को लागू करने और नीतियों का प्रशासन करने के लिए जिम्मेदार होता है।
  • यह सरकार के तीन अंगों में से एक है: विधानपालिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका।
  • आधुनिक लोकतंत्रों में कार्यपालिका निर्णय लेने और शासन चलाने में केंद्रीय भूमिका निभाती है।
  • कार्यपालिका की संरचना और दक्षता सीधे नीति परिणामों और लोकतंत्र की कार्यप्रणाली को प्रभावित करती है।
  • यह विधानपालिका (कानून बनाने) और न्यायपालिका (कानून की व्याख्या) से भिन्न होती है, लेकिन सहयोग आवश्यक है।
  • कार्यपालिका सर्वजनिक सेवाओं का प्रबंधन, कानून और व्यवस्था बनाए रखना और नागरिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है।

2. कार्यपालिका क्या है?

  • कार्यपालिका वह प्राधिकरण है जो राज्य का दैनिक प्रशासन संभालता है।
  • मुख्य कार्य:
    • विधानपालिका द्वारा बनाए गए कानूनों को लागू करना।
    • सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक विकास के लिए नीतियों का निर्माण।
    • सार्वजनिक सेवाओं का प्रबंधन, जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा।
    • आंतरिक कानून और व्यवस्था और बाहरी सुरक्षा बनाए रखना।
  • कार्यपालिका कानूनों की व्याख्या करती है और उन क्षेत्रों में विवेक का प्रयोग करती है जहाँ कानून स्पष्ट नहीं है।
  • यह नागरिकों और सरकार के बीच संपर्क का माध्यम भी है।
  • भारत में कार्यपालिका दो हिस्सों में विभाजित है: राजनीतिक कार्यपालिका और स्थायी कार्यपालिका (ब्यूरोक्रेसी)

3. कार्यपालिका के विभिन्न प्रकार

  • राष्ट्रपति कार्यपालिका (Presidential Executive):
    • राज्य का प्रमुख ही सरकार का प्रमुख भी होता है।
    • उदाहरण: अमेरिका, ब्राज़ील।
    • विशेषताएँ: शक्तियों का पृथक्करण, कार्यपालिका और विधायिका के लिए स्वतंत्र चुनाव।
  • संसदीय कार्यपालिका (Parliamentary Executive):
    • राज्य का प्रमुख (राष्ट्रपति/सम्राट) प्रतीकात्मक होता है।
    • वास्तविक शक्ति प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के पास होती है।
    • उदाहरण: भारत, ब्रिटेन, कनाडा।
    • विशेषताएँ: सामूहिक जिम्मेदारी, शक्तियों का संलयन।
  • अर्ध-राष्ट्रपति कार्यपालिका (Semi-Presidential Executive):
    • राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री दोनों के पास कार्यकारी शक्तियाँ होती हैं।
    • उदाहरण: फ्रांस, रूस।
  • सैनिक या तानाशाही कार्यपालिका (Military/Authoritarian Executive):
    • सत्ता एक नेता या समूह के पास केंद्रीकृत होती है।
    • विधायिका और नागरिकों को सीमित जवाबदेही।
    • उदाहरण: कुछ देशों के पूर्व सैनिक शासन।

4. भारत में संसदीय कार्यपालिका

  • भारत संसदीय प्रणाली अपनाता है, जो वेस्टमिंस्टर प्रणाली पर आधारित है।
  • विशेषताएँ:
    • द्विसदनीय विधायिका (लोकसभा और राज्यसभा) और प्रतीकात्मक राज्य प्रमुख (राष्ट्रपति)।
    • मंत्रिपरिषद की सामूहिक जिम्मेदारी
    • प्रधानमंत्री लोकसभा में बहुमत दल का नेता होता है।
  • कार्यपालिका के घटक:
    • राजनीतिक कार्यपालिका: राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्रिपरिषद।
    • स्थायी कार्यपालिका: ब्यूरोक्रेसी।
  • यह प्रणाली विधायिका के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करती है और प्रशासन को प्रभावी बनाती है।

5. राष्ट्रपति का पद और शक्तियाँ

  • भारत के राष्ट्रपति संवैधानिक प्रमुख और सर्वोच्च कार्यकारी अधिकारी हैं।
  • शक्तियाँ:
    • कार्यकारी शक्तियाँ: प्रधानमंत्री, मंत्रिपरिषद, राज्यपाल और अन्य उच्च अधिकारियों की नियुक्ति।
    • विधायी शक्तियाँ: संसद बुलाना/भंग करना, विधेयकों को मंजूरी देना, अध्यादेश जारी करना।
    • न्यायिक शक्तियाँ: दया, क्षमा, या सजाओं में राहत देना।
    • सैन्य शक्तियाँ: सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर; युद्ध/शांति की घोषणा संसद की स्वीकृति से।
  • राष्ट्रपति अधिकांश मामलों में मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करते हैं।
  • प्रतीकात्मक रूप से राष्ट्र की एकता और संप्रभुता का प्रतिनिधित्व करते हैं।

6. राष्ट्रपति के विवेकाधिकार (Discretionary Powers)

  • विवेकाधिकार वे शक्तियाँ हैं जो राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह के बिना इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • उदाहरण:
    • जब कोई दल स्पष्ट बहुमत नहीं पाता, तब प्रधानमंत्री चुनना।
    • संवैधानिक संकट में सरकार को हटा देना।
    • आपातकालीन परिस्थितियों में संसद को संदेश भेजना।
    • कुछ स्थितियों में लोकसभा को भंग करने से मना करना।
  • ये शक्तियाँ अत्यधिक दुर्लभ हैं और आपातकालीन परिस्थितियों में ही प्रयोग होती हैं।
  • उद्देश्य: शासन की स्थिरता और संवैधानिक मूल्यों की सुरक्षा।

7. प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद

  • प्रधानमंत्री (PM) भारत में वास्तविक कार्यपालिका प्रमुख हैं।
  • नियुक्ति: राष्ट्रपति द्वारा, आमतौर पर लोकसभा में बहुमत दल के नेता।
  • प्रधानमंत्री के कार्य और शक्तियाँ:
    • मंत्रिपरिषद के नेता: बैठकें संचालित करना और मंत्रालयों का समन्वय।
    • राष्ट्रपति को नियुक्तियों और नीतिगत मामलों पर सलाह देना।
    • भारत का घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर प्रतिनिधित्व।
    • राष्ट्रपति, मंत्रिपरिषद और संसद के बीच संचार बनाए रखना।
  • मंत्रिपरिषद:
    • कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री और उप-मंत्रियों से मिलकर बनी।
    • लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से जिम्मेदार।
    • निर्णय लेने, नीतियों का निर्माण और कार्यान्वयन सुनिश्चित करती है।
  • यदि मंत्रिपरिषद लोकसभा का विश्वास खो देती है, तो इसे इस्तीफा देना पड़ता है।

8. स्थायी कार्यपालिका: ब्यूरोक्रेसी

  • ब्यूरोक्रेसी राजनीतिक कार्यपालिका से स्वतंत्र, स्थायी प्रशासनिक अंग है।
  • इसमें सिविल सेवक, IAS/IPS अधिकारी और अन्य प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं।
  • कार्य:
    • विधेयकों और नीतियों को लागू करना।
    • राजनीतिक नेताओं को नीति पर सलाह देना।
    • प्रशासनिक रिकॉर्ड और सांख्यिकी बनाए रखना।
    • राजनीतिक नेतृत्व बदलने के बावजूद प्रशासनिक निरंतरता सुनिश्चित करना।
  • ब्यूरोक्रेसी पारदर्शी, पेशेवर और पदानुक्रमित होती है।
  • यह नागरिकों और सरकार के बीच संपर्क का माध्यम भी है।

9. निष्कर्ष

  • कार्यपालिका शासन का केंद्र है, जो कानून लागू करने, नीतियों को क्रियान्वित करने और नागरिक सेवाएं प्रदान करने का कार्य करती है।
  • भारत की संसदीय प्रणाली सामूहिक जिम्मेदारी और विधायिका द्वारा निगरानी सुनिश्चित करती है।
  • राष्ट्रपति का पद अधिकांशतः प्रतीकात्मक है, लेकिन विवेकाधिकार संकट की स्थितियों में महत्वपूर्ण होता है।
  • प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद राजनीतिक कार्यपालिका का मुख्य भाग हैं, जो नीति निर्माण और प्रशासन का संचालन करते हैं।
  • स्थायी कार्यपालिका (ब्यूरोक्रेसी) स्थिरता, निरपेक्षता और दक्षता प्रदान करती है।
  • सशक्त, संतुलित और जवाबदेह कार्यपालिका एक लोकतंत्र के लिए अनिवार्य है, जो नागरिक अधिकारों की सुरक्षा और प्रभावी शासन सुनिश्चित करती है।

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