कक्षा 9 विज्ञान हमारे आस-पास के पदार्थ नोट्स

पदार्थ की परिभाषा (Definition of Matter)

  • ब्रह्मांड की हर वस्तु पदार्थ से बनी है।
  • वह वस्तु जो स्थान घेरती है और द्रव्यमान रखती है, पदार्थ कहलाती है।
  • उदाहरण: वायु, जल, चीनी, रेत, पत्थर, बादल, तारे, पौधे और जीव-जंतु।
  • ध्वनि, विचार, भावनाएँ आदि पदार्थ नहीं हैं क्योंकि वे न तो स्थान घेरते हैं और न ही द्रव्यमान रखते हैं।

भारतीय और आधुनिक दृष्टिकोण

  • प्राचीन भारतीय दार्शनिकों के अनुसार पदार्थ पाँच मूलभूत तत्वों (पंचतत्व) से बना है —
    आकाश (sky), वायु (air), अग्नि (fire), जल (water), पृथ्वी (earth)
  • आधुनिक विज्ञान के अनुसार पदार्थ को दो प्रकार से वर्गीकृत किया गया है:
    1. भौतिक गुणों के आधार पर → ठोस, द्रव, गैस।
    2. रासायनिक गुणों के आधार पर → तत्त्व, यौगिक, मिश्रण।

पदार्थ का भौतिक स्वरूप (Physical Nature of Matter)

  • पदार्थ अति सूक्ष्म कणों से मिलकर बना है।
  • ये कण परमाणु (Atoms) और अणु (Molecules) हो सकते हैं।
  • ये कण निरंतर गति करते रहते हैं।

पदार्थ के कणों की विशेषताएँ (Characteristics of Particles of Matter)

  1. पदार्थ के कण अत्यंत सूक्ष्म होते हैं।
  2. कणों के बीच खाली स्थान होता है।
  3. कण निरंतर गति करते रहते हैं (कणों में गतिज ऊर्जा होती है)।
  4. कणों में आपस में आकर्षण बल होता है।

पदार्थ की अवस्थाएँ (States of Matter)

  • पदार्थ तीन अवस्थाओं में पाया जाता है — ठोस, द्रव और गैस
  • यह अंतर कणों की दूरी, आकर्षण बल और गतिज ऊर्जा पर निर्भर करता है।

ठोस (Solids)

  • निश्चित आकार और आयतन।
  • कण आपस में बहुत पास-पास और मजबूत आकर्षण बल से जुड़े।
  • संपीड्य नहीं।
  • केवल अपनी जगह पर कंपन करते हैं।
  • उदाहरण: बर्फ, लकड़ी, लोहा, पत्थर, नमक, किताब।

द्रव (Liquids)

  • निश्चित आयतन लेकिन आकार निश्चित नहीं।
  • पात्र का आकार ग्रहण कर लेते हैं।
  • कण थोड़े ढीले, सरक सकते हैं।
  • हल्की संपीड्यता।
  • उदाहरण: पानी, दूध, तेल, रस, शराब, पारा।

गैस (Gases)

  • न आकार निश्चित, न आयतन।
  • पूरा पात्र भर लेते हैं।
  • कण बहुत दूर-दूर और स्वतंत्र गति में।
  • अत्यधिक संपीड्य।
  • उदाहरण: ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, हाइड्रोजन, हीलियम, कार्बन डाइऑक्साइड, जलवाष्प।

ठोस, द्रव और गैस का तुलनात्मक अध्ययन

विशेषताठोस (Solid)द्रव (Liquid)गैस (Gas)
आकारनिश्चितनिश्चित नहीं, पात्र का आकार लेता हैकोई निश्चित आकार नहीं
आयतननिश्चितनिश्चितनिश्चित नहीं
कणों की दूरीबहुत पासथोड़े दूरबहुत दूर
संपीड्यतानगण्यबहुत कमअत्यधिक
गतिशीलताकेवल कंपनसरक सकते हैंस्वतंत्र गति
उदाहरणबर्फ, लोहा, लकड़ी, नमक, पत्थर, किताबपानी, दूध, तेल, रस, शराब, पाराऑक्सीजन, नाइट्रोजन, हाइड्रोजन, CO₂, हीलियम, जलवाष्प

अन्य महत्वपूर्ण परिभाषाएँ

  • द्रवणशीलता/विसरण (Diffusion): कणों की स्वतः मिश्रण की प्रवृत्ति।
  • द्रव (Fluid): जो बह सके, जैसे तरल और गैस।
  • ब्राउनियन गति: द्रव या गैस में निलंबित सूक्ष्म कणों की अनियमित, तिरछी-सी गति।
  • विसरण ठोस में सबसे धीमा और गैसों में सबसे तेज़ होता है।
  • ताप बढ़ने से विसरण की दर बढ़ती है।

अवस्थाओं का परस्पर परिवर्तन (Inter-conversion of States of Matter)

(a) तापमान बदलकर

  • ठोस को गर्म करने पर उसके कणों की गतिज ऊर्जा बढ़ती है और आकर्षण बल कम हो जाता है।
  • इससे ठोस द्रव में और द्रव गैस में बदल जाता है।
  • गलनांक (Melting point): वह तापमान जिस पर ठोस द्रव में बदलता है। बर्फ का गलनांक = 0°C या 273.16 K।
  • गमन (Fusion): ठोस का द्रव में बदलना।

गुप्त ऊष्मा (Latent Heat):

  • अवस्था परिवर्तन के लिए ली गई ऊष्मा।
  • गुप्त ऊष्मा का दो प्रकार:
    1. गलन की गुप्त ऊष्मा (Latent Heat of Fusion): 1 किग्रा ठोस को द्रव में बदलने हेतु आवश्यक ऊष्मा।
    2. वाष्पन की गुप्त ऊष्मा (Latent Heat of Vaporisation): 1 किग्रा द्रव को गैस में बदलने हेतु आवश्यक ऊष्मा।
  • तापमान को केल्विन (K) में व्यक्त किया जाता है।
    0°C = 273 K।

(b) दाब बदलकर

  • दाब बढ़ाकर और ताप घटाकर गैस को द्रव में बदला जा सकता है।
  • ठोस CO₂ (ड्राई आइस) एक वायुमंडलीय दाब पर सीधे गैस में बदल जाता है।

उर्ध्वपातन (Sublimation)

  • ठोस का सीधे गैस में और गैस का सीधे ठोस में बदलना।
  • उदाहरण: कपूर, नेफ़्थलीन।

वाष्पीकरण (Evaporation)

  • द्रव का बिना उबलने के धीरे-धीरे गैस में बदलना।
  • यह सतह पर होता है।
  • उदाहरण: कपड़ों का सुखना।

वाष्पीकरण को प्रभावित करने वाले कारक:

  1. सतह क्षेत्रफल – अधिक सतह, अधिक वाष्पीकरण।
  2. तापमान – अधिक तापमान, अधिक वाष्पीकरण।
  3. आर्द्रता – अधिक आर्द्रता, कम वाष्पीकरण।
  4. हवा की गति – तेज़ हवा, अधिक वाष्पीकरण।

वाष्पीकरण से शीतलन (Cooling Effect):

  • जब द्रव वाष्पित होता है तो वह आसपास से ऊष्मा खींच लेता है, जिससे ठंडक महसूस होती है।
  • पसीना सूखने पर शरीर ठंडा हो जाता है।

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