⭐ अध्याय 4 – प्राथमिक गतिविधियाँ (Primary Activities)
1. प्राथमिक गतिविधियों का परिचय
- अर्थ
- प्राथमिक गतिविधियाँ वे कार्य हैं जिनमें प्राकृतिक संसाधनों का दोहन, संग्रह, उपयोग और उत्पादन किया जाता है।
- ये सभी आर्थिक गतिविधियों की नींव हैं क्योंकि उद्योग और सेवाएँ इन्हीं से प्राप्त कच्चे माल पर निर्भर करती हैं।
- उदाहरण
- शिकार, संग्रह, पशुपालन, कृषि, मत्स्य पालन, वानिकी, खनन आदि।
- मुख्य विशेषताएँ
- प्रत्यक्ष रूप से प्रकृति पर निर्भर।
- उन्नत तकनीक का कम उपयोग, विशेषकर विकासशील देशों में।
- श्रम प्रधान गतिविधियाँ।
- उत्पादन प्राकृतिक परिस्थितियों पर आधारित।
- महत्व
- मानव सभ्यता की शुरुआत इन्हीं गतिविधियों से हुई।
- भोजन, ईंधन, जल, खनिज और कच्चा माल उपलब्ध कराते हैं।
- ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार देते हैं।
- आर्थिक विकास का आधार तैयार करते हैं।
2. शिकार और संग्रह (Hunting and Gathering)
A. परिभाषा
- शिकार: जंगली जानवरों का शिकार करना ताकि भोजन, खाल, हड्डियाँ और औजार प्राप्त हों।
- संग्रह: जंगलों से फल, कंद-मूल, पत्तियाँ, जड़ी-बूटियाँ, शहद आदि प्राकृतिक वस्तुओं का संग्रह।
B. मुख्य विशेषताएँ
- सबसे पुरानी जीविका पद्धति
- मानव ने प्रारंभ में भोजन केवल शिकार और संग्रह से प्राप्त किया।
- प्रकृति पर पूर्ण निर्भरता
- मौसम, वनस्पति और पशु-संख्या के अनुसार जीवन चलता है।
- यायावर जीवनशैली
- लोग भोजन की खोज में निरंतर स्थान बदलते हैं।
- कम उत्पादन
- सीमित साधन, कम तकनीक और अनिश्चित संसाधन।
- सरल औजारों का उपयोग
- धनुष-बाण, भाले, जाल, पत्थर, खोदने वाली लकड़ी।
- स्वदेशी ज्ञान प्रणाली
- जंगल, मौसम और पशुओं के व्यवहार का गहरा ज्ञान।
C. वर्तमान में पाए जाने वाले क्षेत्र
- अमेज़न बेसिन
- अफ्रीका के कांगो वन
- उत्तरी कनाडा और अलास्का
- ऑस्ट्रेलिया के मरुस्थलीय क्षेत्र (एबोरिजिनल जनजातियाँ)
- आर्कटिक क्षेत्र (इनुइट जनजाति)
D. शिकार और संग्रह में गिरावट के कारण
- वन क्षेत्र में कमी
- पशु-संख्या में कमी
- सरकारी प्रतिबंध
- कृषि और उद्योग का विस्तार
- आधुनिकीकरण और स्थाई बसावट
3. पशुपालन (Pastoralism)
A. अर्थ
- प्राकृतिक चरागाहों पर पशुओं को पालना, चराना और उनसे दूध, मांस, ऊन आदि प्राप्त करना।
B. विशेषताएँ
- प्राकृतिक घासभूमियों पर निर्भरता
- मौसम के अनुसार स्थानांतरण
- कम तकनीक और परंपरागत साधन
- विभिन्न प्रकार के पशु – भेड़, बकरी, ऊँट, याक, रेनडियर आदि
- परिवार आधारित कार्य प्रणाली
C. पशुपालन के प्रकार
1. घुमंतू पशुपालन (Nomadic Pastoralism)
- पशुपालक परिवार निरंतर नए चरागाहों की खोज में घूमते रहते हैं।
विशेषताएँ:
- यायावर जीवन
- वर्षा और घास की उपलब्धता पर निर्भर
- सामूहिक चराई
- जनसंख्या घनत्व कम
उदाहरण:
- पूर्वी अफ्रीका के मासाई
- अरब के बेडुइन
- मध्य एशिया के किरगिज
- भारत के गूज्जर, बकरवाल
2. स्थायी / अर्ध-घुमंतू पशुपालन
- लोग स्थाई बस्तियों में रहते हैं परंतु पशुओं को मौसम अनुसार चराई पर ले जाते हैं।
- इसे ट्रांसह्यूमेंस (Transhumance) भी कहा जाता है।
उदाहरण:
- हिमालय क्षेत्रों के चरवाहे
- यूरोप के पर्वतीय क्षेत्र
D. पशुपालन का महत्व
- दूध, मांस, ऊन, चमड़ा
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था मज़बूत
- कठिन भौगोलिक क्षेत्रों का उपयोग
- सांस्कृतिक परंपराओं का संरक्षण
4. व्यावसायिक पशुधन पालन (Commercial Livestock Rearing)
A. अर्थ
- आधुनिक तकनीक, बड़े खेतों और वैज्ञानिक प्रबंधन पर आधारित पशुपालन का व्यावसायिक रूप।
B. विशेषताएँ
- विशाल रैंच (Ranches)
- चुनिंदा नस्लों के पशु
- उच्च पूंजी निवेश
- वैज्ञानिक प्रबंधन – टीकाकरण, प्रजनन
- मशीनों का अधिक उपयोग
- बाज़ार हेतु उत्पादन
C. प्रमुख क्षेत्र
- अर्जेंटीना और उरुग्वे (पम्पास क्षेत्र)
- अमेरिका
- ऑस्ट्रेलिया
- न्यूजीलैंड
- दक्षिण अफ्रीका
D. लाभ
- उच्च उत्पादन
- अंतरराष्ट्रीय व्यापार में योगदान
- आधुनिक प्रबंधन से कम जोखिम
- रोजगार सृजन
5. कृषि (Agriculture)
A. अर्थ
- भूमि पर फसलों की खेती और पशुओं को पालकर भोजन, ईंधन, फाइबर और औद्योगिक कच्चा माल तैयार करना।
B. कृषि का महत्व
- विश्व की अधिकांश आबादी का भोजन
- बड़ी संख्या में रोजगार
- उद्योगों को कच्चा माल
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़
- सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन पर प्रभाव
C. कृषि को प्रभावित करने वाले कारक
- प्राकृतिक कारक – जलवायु, वर्षा, तापमान, मृदा
- आर्थिक कारक – बाजार, पूंजी, मशीनें
- सामाजिक कारक – जनसंख्या, परंपराएँ
- राजनीतिक कारक – सरकारी नीतियाँ, सब्सिडी
- तकनीकी कारक – HYV बीज, उर्वरक, सिंचाई
6. गहन जीविकोपार्जन कृषि (Intensive Subsistence Agriculture)
A. अर्थ
- अत्यधिक जनसंख्या वाले क्षेत्रों में छोटी भूमि पर अधिक श्रम और पारंपरिक तकनीक से की जाने वाली कृषि, जिसका मुख्य उद्देश्य परिवार की भोजन आवश्यकताओं को पूरा करना होता है।
B. विशेषताएँ
- छोटे खेत
- अधिक श्रम निवेश
- वर्ष में कई फसलें (Multiple Cropping)
- उर्वरकों और सिंचाई का उपयोग
- प्राकृतिक परिस्थितियों पर निर्भरता
- खाद्यान्न फसलें – चावल, गेहूँ, दालें
C. क्षेत्र
- भारत, चीन, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, वियतनाम, जापान।
D. लाभ
- भूमि का अधिकतम उपयोग
- स्थानीय भोजन सुरक्षा
- उच्च उत्पादन क्षमता
E. सीमाएँ
- कम आय
- मिट्टी की उर्वरता में कमी
- जनसंख्या का दबाव
- मानसून पर निर्भरता
7. व्यापक व्यावसायिक अनाज खेती (Extensive Commercial Grain Cultivation)
A. अर्थ
- बड़े आकार के खेतों पर आधुनिक मशीनों से अनाज की व्यावसायिक खेती।
B. विशेषताएँ
- विशाल खेत
- कम श्रम, अधिक मशीनें
- एक ही फसल (Monoculture)
- बाजार हेतु उत्पादन
- परिवहन और तकनीक पर निर्भरता
C. प्रमुख फसलें
- गेहूँ, मक्का, जौ, जई
D. प्रमुख क्षेत्र
- अमेरिका (प्रेयरी)
- कनाडा
- ऑस्ट्रेलिया
- रूस
- यूक्रेन (स्तेपी क्षेत्र)
E. लाभ
- उच्च उत्पादकता
- कम श्रम लागत
- अंतरराष्ट्रीय व्यापार बढ़ता है
F. समस्याएँ
- मिट्टी का कटाव
- मौसम पर निर्भरता
- एक ही फसल से जैव विविधता घटती है
- बाजार जोखिम
8. मिश्रित कृषि (Mixed Farming)
A. अर्थ
- एक ही खेत में पशुपालन और फसल उत्पादन दोनों का संयुक्त रूप से संचालन।
B. विशेषताएँ
- दोहरे आय स्रोत
- चारा-फसल और खाद का चक्र
- जोखिम कम
- मध्यम आकार के खेत
- तकनीक और श्रम दोनों का उपयोग
C. फसलें एवं पशु
- फसलें: गेहूँ, मक्का, मेथी, चारा फसलें
- पशु: गाय, भैंस, सूअर, भेड़, मुर्गी
D. प्रमुख क्षेत्र
- पश्चिमी यूरोप
- उत्तरी अमेरिका
- रूस
- न्यूज़ीलैंड
- भारत के कुछ भाग
E. लाभ
- संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग
- आय स्थिर
- मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है
9. डेयरी खेती (Dairy Farming)
A. अर्थ
- दूध एवं दुग्ध उत्पादों (घी, मक्खन, पनीर, दही) का उत्पादन करने वाली विशेषीकृत कृषि।
B. विशेषताएँ
- अत्यधिक पूंजी निवेश
- वैज्ञानिक नस्लें
- स्वचालित दुग्ध निकासी
- दूध प्रसंस्करण इकाइयाँ
- पशु चिकित्सा सेवाएँ
- शहरी बाजारों के निकट
C. प्रमुख क्षेत्र
- डेनमार्क, नीदरलैंड, ब्रिटेन
- अमेरिका व कनाडा
- भारत (पंजाब, हरियाणा, गुजरात)
- न्यूजीलैंड
- ऑस्ट्रेलिया
D. लाभ
- प्रतिदिन आय
- पौष्टिक उत्पाद
- ग्रामीण विकास
- महिला रोजगार
E. चुनौतियाँ
- चारा महँगा
- रोग फैलाव
- परिवहन समस्या
- पूंजी की आवश्यकता
10. खनन गतिविधियाँ प्रभावित करने वाले कारक (Factors Affecting Mining Activity)
A. भूवैज्ञानिक कारक
- खनिजों की गुणवत्ता और मात्रा
- खनिज का गहराई स्तर
- चट्टानों की संरचना
B. भौतिक कारक
- जलवायु – अत्यधिक ठंड/गर्मी बाधक
- स्थलाकृति – पहाड़ी क्षेत्रों में लागत अधिक
- जल उपलब्धता
- वन क्षेत्र
C. आर्थिक कारक
- पूंजी निवेश
- श्रम उपलब्धता
- परिवहन सुविधा
- बाजार मांग
- तकनीक
D. सामाजिक-राजनीतिक कारक
- सरकारी नीतियाँ
- पर्यावरण कानून
- भूमि अधिग्रहण
- स्थानीय समुदायों का समर्थन
E. पर्यावरणीय प्रभाव
- मिट्टी कटाव
- जल प्रदूषण
- वन कटाई
- वायु प्रदूषण
- जैव विविधता ह्रास
11. निष्कर्ष (Conclusion)
- प्राथमिक गतिविधियाँ मानव जीवन और विश्व अर्थव्यवस्था की आधारशिला हैं।
- इनमें शिकार, संग्रह, पशुपालन, कृषि, खनन और मछली पकड़ना शामिल हैं।
- समय के साथ पारंपरिक प्रथाएँ तकनीक आधारित आधुनिक रूपों में बदल गई हैं।
- कृषि आज भी सबसे बड़ा रोजगार और खाद्य आपूर्ति स्रोत है।
- व्यावसायिक पशुपालन व खनन उद्योगों को मजबूत करते हैं।
- संसाधनों की सीमितता को ध्यान में रखते हुए सतत विकास आवश्यक है।
- प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग ही भविष्य की पर्यावरणीय और आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित कर सकता है।
