कक्षा 11 राजनीतिक विज्ञान नोट्स – कार्यपालिका
1. परिचय
- कार्यपालिका वह अंग है जो कानूनों को लागू करने और नीतियों का प्रशासन करने के लिए जिम्मेदार होता है।
- यह सरकार के तीन अंगों में से एक है: विधानपालिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका।
- आधुनिक लोकतंत्रों में कार्यपालिका निर्णय लेने और शासन चलाने में केंद्रीय भूमिका निभाती है।
- कार्यपालिका की संरचना और दक्षता सीधे नीति परिणामों और लोकतंत्र की कार्यप्रणाली को प्रभावित करती है।
- यह विधानपालिका (कानून बनाने) और न्यायपालिका (कानून की व्याख्या) से भिन्न होती है, लेकिन सहयोग आवश्यक है।
- कार्यपालिका सर्वजनिक सेवाओं का प्रबंधन, कानून और व्यवस्था बनाए रखना और नागरिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है।
2. कार्यपालिका क्या है?
- कार्यपालिका वह प्राधिकरण है जो राज्य का दैनिक प्रशासन संभालता है।
- मुख्य कार्य:
- विधानपालिका द्वारा बनाए गए कानूनों को लागू करना।
- सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक विकास के लिए नीतियों का निर्माण।
- सार्वजनिक सेवाओं का प्रबंधन, जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा।
- आंतरिक कानून और व्यवस्था और बाहरी सुरक्षा बनाए रखना।
- कार्यपालिका कानूनों की व्याख्या करती है और उन क्षेत्रों में विवेक का प्रयोग करती है जहाँ कानून स्पष्ट नहीं है।
- यह नागरिकों और सरकार के बीच संपर्क का माध्यम भी है।
- भारत में कार्यपालिका दो हिस्सों में विभाजित है: राजनीतिक कार्यपालिका और स्थायी कार्यपालिका (ब्यूरोक्रेसी)।
3. कार्यपालिका के विभिन्न प्रकार
- राष्ट्रपति कार्यपालिका (Presidential Executive):
- राज्य का प्रमुख ही सरकार का प्रमुख भी होता है।
- उदाहरण: अमेरिका, ब्राज़ील।
- विशेषताएँ: शक्तियों का पृथक्करण, कार्यपालिका और विधायिका के लिए स्वतंत्र चुनाव।
- संसदीय कार्यपालिका (Parliamentary Executive):
- राज्य का प्रमुख (राष्ट्रपति/सम्राट) प्रतीकात्मक होता है।
- वास्तविक शक्ति प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के पास होती है।
- उदाहरण: भारत, ब्रिटेन, कनाडा।
- विशेषताएँ: सामूहिक जिम्मेदारी, शक्तियों का संलयन।
- अर्ध-राष्ट्रपति कार्यपालिका (Semi-Presidential Executive):
- राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री दोनों के पास कार्यकारी शक्तियाँ होती हैं।
- उदाहरण: फ्रांस, रूस।
- सैनिक या तानाशाही कार्यपालिका (Military/Authoritarian Executive):
- सत्ता एक नेता या समूह के पास केंद्रीकृत होती है।
- विधायिका और नागरिकों को सीमित जवाबदेही।
- उदाहरण: कुछ देशों के पूर्व सैनिक शासन।
4. भारत में संसदीय कार्यपालिका
- भारत संसदीय प्रणाली अपनाता है, जो वेस्टमिंस्टर प्रणाली पर आधारित है।
- विशेषताएँ:
- द्विसदनीय विधायिका (लोकसभा और राज्यसभा) और प्रतीकात्मक राज्य प्रमुख (राष्ट्रपति)।
- मंत्रिपरिषद की सामूहिक जिम्मेदारी।
- प्रधानमंत्री लोकसभा में बहुमत दल का नेता होता है।
- कार्यपालिका के घटक:
- राजनीतिक कार्यपालिका: राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्रिपरिषद।
- स्थायी कार्यपालिका: ब्यूरोक्रेसी।
- यह प्रणाली विधायिका के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करती है और प्रशासन को प्रभावी बनाती है।
5. राष्ट्रपति का पद और शक्तियाँ
- भारत के राष्ट्रपति संवैधानिक प्रमुख और सर्वोच्च कार्यकारी अधिकारी हैं।
- शक्तियाँ:
- कार्यकारी शक्तियाँ: प्रधानमंत्री, मंत्रिपरिषद, राज्यपाल और अन्य उच्च अधिकारियों की नियुक्ति।
- विधायी शक्तियाँ: संसद बुलाना/भंग करना, विधेयकों को मंजूरी देना, अध्यादेश जारी करना।
- न्यायिक शक्तियाँ: दया, क्षमा, या सजाओं में राहत देना।
- सैन्य शक्तियाँ: सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर; युद्ध/शांति की घोषणा संसद की स्वीकृति से।
- राष्ट्रपति अधिकांश मामलों में मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करते हैं।
- प्रतीकात्मक रूप से राष्ट्र की एकता और संप्रभुता का प्रतिनिधित्व करते हैं।
6. राष्ट्रपति के विवेकाधिकार (Discretionary Powers)
- विवेकाधिकार वे शक्तियाँ हैं जो राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह के बिना इस्तेमाल कर सकते हैं।
- उदाहरण:
- जब कोई दल स्पष्ट बहुमत नहीं पाता, तब प्रधानमंत्री चुनना।
- संवैधानिक संकट में सरकार को हटा देना।
- आपातकालीन परिस्थितियों में संसद को संदेश भेजना।
- कुछ स्थितियों में लोकसभा को भंग करने से मना करना।
- ये शक्तियाँ अत्यधिक दुर्लभ हैं और आपातकालीन परिस्थितियों में ही प्रयोग होती हैं।
- उद्देश्य: शासन की स्थिरता और संवैधानिक मूल्यों की सुरक्षा।
7. प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद
- प्रधानमंत्री (PM) भारत में वास्तविक कार्यपालिका प्रमुख हैं।
- नियुक्ति: राष्ट्रपति द्वारा, आमतौर पर लोकसभा में बहुमत दल के नेता।
- प्रधानमंत्री के कार्य और शक्तियाँ:
- मंत्रिपरिषद के नेता: बैठकें संचालित करना और मंत्रालयों का समन्वय।
- राष्ट्रपति को नियुक्तियों और नीतिगत मामलों पर सलाह देना।
- भारत का घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर प्रतिनिधित्व।
- राष्ट्रपति, मंत्रिपरिषद और संसद के बीच संचार बनाए रखना।
- मंत्रिपरिषद:
- कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री और उप-मंत्रियों से मिलकर बनी।
- लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से जिम्मेदार।
- निर्णय लेने, नीतियों का निर्माण और कार्यान्वयन सुनिश्चित करती है।
- यदि मंत्रिपरिषद लोकसभा का विश्वास खो देती है, तो इसे इस्तीफा देना पड़ता है।
8. स्थायी कार्यपालिका: ब्यूरोक्रेसी
- ब्यूरोक्रेसी राजनीतिक कार्यपालिका से स्वतंत्र, स्थायी प्रशासनिक अंग है।
- इसमें सिविल सेवक, IAS/IPS अधिकारी और अन्य प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं।
- कार्य:
- विधेयकों और नीतियों को लागू करना।
- राजनीतिक नेताओं को नीति पर सलाह देना।
- प्रशासनिक रिकॉर्ड और सांख्यिकी बनाए रखना।
- राजनीतिक नेतृत्व बदलने के बावजूद प्रशासनिक निरंतरता सुनिश्चित करना।
- ब्यूरोक्रेसी पारदर्शी, पेशेवर और पदानुक्रमित होती है।
- यह नागरिकों और सरकार के बीच संपर्क का माध्यम भी है।
9. निष्कर्ष
- कार्यपालिका शासन का केंद्र है, जो कानून लागू करने, नीतियों को क्रियान्वित करने और नागरिक सेवाएं प्रदान करने का कार्य करती है।
- भारत की संसदीय प्रणाली सामूहिक जिम्मेदारी और विधायिका द्वारा निगरानी सुनिश्चित करती है।
- राष्ट्रपति का पद अधिकांशतः प्रतीकात्मक है, लेकिन विवेकाधिकार संकट की स्थितियों में महत्वपूर्ण होता है।
- प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद राजनीतिक कार्यपालिका का मुख्य भाग हैं, जो नीति निर्माण और प्रशासन का संचालन करते हैं।
- स्थायी कार्यपालिका (ब्यूरोक्रेसी) स्थिरता, निरपेक्षता और दक्षता प्रदान करती है।
- सशक्त, संतुलित और जवाबदेह कार्यपालिका एक लोकतंत्र के लिए अनिवार्य है, जो नागरिक अधिकारों की सुरक्षा और प्रभावी शासन सुनिश्चित करती है।
